Find all commerce topics, Business studies , Accountancy, Economics, Online test , Exam preparation

Breaking

Friday, 24 April 2026

Online Test | Chapter 1 | Accounting for Not for Profit Organisations | 12th Accountancy

Online Test | Chapter 1 | Accounting for Not for Profit Organisations | 12th Accountancy


ऑनलाइन टेस्ट देने के लिए यहाँ क्लिक करें 



तैयारी करने के लिए वीडियो देखें



कक्षा 12 लेखाशास्त्र में अलाभकारी संस्थाओं के लिए लेखांकन पहला अध्याय है (सीबीएसई और कई राज्य बोर्डों में)। यह छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि क्लब, ट्रस्ट, स्कूल, अस्पताल और अन्य सेवा‑उन्मुख संस्थाएँ खाते कैसे रखती हैं, जहाँ मुख्य उद्देश्य लाभ नहीं, सेवा होता है।

अलाभकारी संस्था (Not‑for‑Profit Organisation – NPO) एक ऐसा संगठन है जो समाज की भलाई के लिए काम करती है, जैसे क्लब, चैरिटेबल ट्रस्ट, स्कूल, अस्पताल, धार्मिक संस्था या खेल संस्था। इसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि सेवा प्रदान करना होता है; मुनाफे का वितरण सदस्यों में नहीं होता है।

ऐसी संस्थाओं के आय के सामान्य स्रोत हैं:

  • सदस्य शुल्क और सब्सक्रिप्शन

  • दान और अनुदान

  • लाइफ‑मेम्बरशिप शुल्क और वसीयत/लीगेसी

  • निवेश से आय (ब्याज, लाभांश)

ये प्राप्य (receipts) पहले प्राप्ति एवं भुगतान खाते में दर्ज होते हैं और फिर आय व्यय खाते में समायोजित किए जाते हैं।

अलाभकारी संस्थाओं की मुख्य विशेषताएँ

अलाभकारी संस्थाएँ सामान्य व्यवसाय संस्थानों से कई तरह से अलग होती हैं:

  • लाभ उद्देश्य की अनुपस्थिति: आधिक्य (सरप्लस) सदस्यों में नहीं बाँटा जाता; उसे पूँजी निधि या सामान्य निधि में रखा जाता है, ताकि भविष्य की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो सके।

  • सदस्यता‑आधारित संरचना: अक्सर संस्था का प्रबंधन सदस्यों द्वारा चुने गए प्रबंध समिति द्वारा किया जाता है।

  • प्राप्ति‑आधारित आय: आय अधिकतर दान, अनुदान और सदस्यता से आती है, बिक्री से नहीं।

  • द्वैत लेखा प्रणाली: अलाभकारी संस्थाएँ भी द्वैत लेखा प्रणाली अपनाती हैं और तीन खाते तैयार करती हैं:

    1. प्राप्ति एवं भुगतान खाता

    2. आय व्यय खाता

    3. आर्थिक चिट्ठा (Balance Sheet)


अलाभकारी संस्थाओं के महत्वपूर्ण वित्तीय विवरण

12वीं कक्षा में तीन मुख्य वित्तीय विवरण प्रमुख हैं:

  1. प्राप्ति एवं भुगतान खाता (Receipts and Payments Account)

    • यह वर्ष के दौरान हुए नकद और बैंक के लेन‑देनों का सारांश है।

    • यह आय व्यय खाते का सही रूप नहीं है; इसमें पूँजीगत और आयगत दोनों प्रकार के लेन‑देन आते हैं।

  2. आय व्यय खाता (Income and Expenditure Account)

    • यह एक नाममात्र खाता है, जो अवधि आधार (Accrual Basis) पर बनाया जाता है।

    • इसमें केवल वर्ष की आय और व्यय दिखाए जाते हैं और यह बताता है कि वर्ष में आधिक्य (सरप्लस) है या कमी (डेफिसिट)

  3. आर्थिक चिट्ठा (Balance Sheet)

    • यह संस्था की वर्ष के अंत में आर्थिक स्थिति दिखाता है।

    • संपत्ति पक्ष पर: नकद, बैंक, निवेश, फर्नीचर, भवन आदि।

    • दायित्व पक्ष पर: पूँजी निधि, ऋण, बकाया देयताएँ आदि।


पूँजी निधि बनाम व्यापार में पूँजी

व्यवसाय में हम पूँजी की बात करते हैं, लेकिन अलाभकारी संस्थाओं में आमतौर पर पूँजी निधि (Capital Fund) या सामान्य निधि का प्रयोग होता है।

  • पूँजी निधि = प्रारंभिक पूँजी निधि + वर्षों में हुए आधिक्य (या – कमी) + पूँजीगत माने जाने वाले दान – कोई भी निकासी।

  • जो दान विशेष उद्देश्यों के लिए (जैसे भवन निर्माण, पुरस्कार निधि) दिए जाते हैं, उन्हें अलग निधि के रूप में रखा जाता है और उपयोग होने तक दायित्व पक्ष पर दर्शाया जाता है।


कुछ महत्वपूर्ण वस्तुओं का लेखा विवरण

12वीं में अक्सर निम्नलिखित वस्तुओं का लेखा विवरण आता है:

  • सदस्यता (Subscription)

    • बकाया सदस्यता वर्तमान वर्ष की सदस्यता में जोड़ी जाती है।

    • अग्रिम सदस्यता घटाई जाती है और दायित्व के रूप में दिखाई जाती है।

  • लाइफ‑मेम्बरशिप शुल्क

    • इसे पूँजीगत प्राप्ति माना जाता है और पूँजी निधि में जोड़ा जाता है, वार्षिक आय की तरह नहीं।

  • प्रवेश शुल्क और दान

    • यदि ये छोटे और दोहराए जाने वाले हों, तो आयगत आय माने जा सकते हैं।

    • यदि बड़े और दीर्घकालिक उपयोग के लिए हों, तो पूँजीगत माने जाते हैं।

  • पुरानी संपत्ति की बिक्री

    • पुराने अखबार, खेल सामग्री आदि की बिक्री को आयगत आय माना जाता है।

    • भवन, फर्नीचर जैसी स्थायी संपत्ति की बिक्री आमतौर पर पूँजीगत प्राप्ति मानी जाती है।


छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव (आप शिक्षक के रूप में)

12वीं के छात्रों को यह अध्याय समझाते समय आप निम्न बातों पर जोर दे सकते हैं:

  • पहले मूल शब्दों की स्पष्ट परिभाषा (अलाभकारी संस्था, पूँजी निधि, आधिक्य, कमी) दीजिए।

  • प्राप्ति एवं भुगतान खाते से आय व्यय खाता में परिवर्तन के अभ्यास प्रश्न नियमित रूप से दीजिए।

  • वास्तविक जीवन के उदाहरण जैसे स्थानीय क्लब, स्कूल ट्रस्ट या चैरिटेबल अस्पताल का उपयोग करके अवधारणाओं को रोचक बनाइए।

  • लघु उत्तरीय और व्यावहारिक प्रश्न (सदस्यता समायोजन, लाइफ‑मेम्बरशिप का विवरण, आर्थिक चिट्ठा तैयार करना) अवश्य दीजिए।


यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?

यह अध्याय छात्रों को गैर‑व्यावसायिक संस्थाओं के लेखांकन की नींव प्रदान करता है और उन्हें समझने में मदद करता है कि सेवा‑उन्मुख संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे बनाई जाती है। यही अवधारणाएँ आगे चलकर साझेदारी खाते और कंपनियों के वित्तीय विवरण समझने में भी मददगार होती हैं।

#OnlineTest 11th Business Studies Chapter 2 | व्यावसायिक क्रियाओं का वर्गीकरण | Classification of Business Activities 


No comments:

Post a Comment